यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव, भाजपा में मंथन तेज
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होने जा रहे हैं और सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मौजूदा संख्या बल के हिसाब से इनमें से 8 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास है। यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों के लिए एक अहम पड़ाव बन गया है।
चुनाव की पूरी टाइमलाइन
चुनाव आयोग के मुताबिक 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी, पूरी प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी होनी है। दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन उत्तराखंड की एक और पश्चिम बंगाल की एक सीट पर भी चुनाव होंगे, यानी कुल मिलाकर तीन राज्यों की 12 सीटों पर एक साथ वोटिंग होगी।
दरअसल पार्टी के 7 मौजूदा राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, वहीं दिनेश शर्मा के अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनने के बाद इस्तीफा देने से एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है।
इन 7 सदस्यों का खत्म हो रहा कार्यकाल
जिन 7 भाजपा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और हरदीप सिंह पुरी, पूर्व डीजीपी बृजलाल, नीरज शेखर, अरुण सिंह, गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी का नाम शामिल है।
किसकी दावेदारी मजबूत, किसका पत्ता कट सकता है
चर्चाओं के मुताबिक बीएल वर्मा, जो पिछड़ी लोध बिरादरी से आते हैं और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं, उनकी दोबारा राज्यसभा जाने की संभावना सबसे मजबूत बताई जा रही है। वहीं सीमा द्विवेदी को इस बार आगामी विधानसभा चुनाव में उतारे जाने की चर्चा है।
स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी की दावेदारी को मजबूत बताया जा रहा है। इसी बीच एक और दिलचस्प नाम सामने आया है — पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का नाम भी रेस में सबसे आगे चल रहा है, और पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जाट, गुर्जर, पिछड़ी जातियों और महिलाओं को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर दोबारा राज्यसभा जाने के इच्छुक हैं, लेकिन उनके नाम को लेकर पार्टी में असमंजस बना हुआ है। वहीं पूर्वांचल से आने वाले पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की दावेदारी मजबूत होने के बावजूद इस बार दोबारा मौका न मिलने की अटकलें हैं।
दो नए चेहरे लगभग फाइनल
फिलहाल की चर्चाओं के आधार पर स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी का नाम नए चेहरों के तौर पर लगभग तय माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि बाकी बची सीटों पर पार्टी किन पुराने और नए चेहरों पर भरोसा जताती है।

