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कोलकाता के चोरबागान पूजा पंडाल में भगदड़, 19 लोगों की मौत, भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल

कोलकाता।

दुर्गा पूजा के दौरान भारी भीड़ को संभालने के लिए कोलकाता पुलिस की कई लोगों ने तारीफ की थी। लेकिन इस साल सप्तमी की रात उत्तर कोलकाता के सबसे बड़े सार्वजनिक पूजा पंडालों में से एक, चोरबागान में हुई भगदड़ ने सब कुछ बदल दिया। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, और अब पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

शनिवार शाम को क्या हुआ?

सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में दिख रहा है कि शनिवार शाम बारिश होने के बाद पंडाल में घोषणा की गई कि बारिश की वजह से पंडाल गिर सकता है। इसके तुरंत बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में करीब 25 लोग घायल भी हुए हैं।

कई चश्मदीदों और स्थानीय लोगों ने इस घटना के बारे में स्थानीय मीडिया को जानकारी दी है। सोशल मीडिया पोस्ट और चश्मदीदों के बयानों में यह शिकायत भी की गई है कि भीड़ को संभालने में दिक्कतें थीं और पंडाल में आने-जाने के रास्ते संकरे थे।

कार्रवाई और मुआवजा

हादसे के बाद मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। पुलिस ने आयोजक समिति के पदाधिकारियों समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये के मुआवजे और सरकारी नौकरी का ऐलान किया है।

भीड़ कोलकाता की पूजा का हिस्सा है, पर इतनी?

दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में भारी भीड़ कोई नई बात नहीं है। 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित एएनटी कॉर्पोरेशन नाम की संस्था के एक सर्वे के मुताबिक, मध्य कोलकाता में सियालदह के पास संतोष मित्रा पार्क में हर घंटे करीब 48,000 लोग पूजा देखने पहुंचे। त्रिधारा अकालबोधन और बेहाला नूतन दल जैसी लोकप्रिय पूजा समितियों के पंडालों में भी हर घंटे 25,000 से ज्यादा लोग पहुंचे।

यही आंकड़े बताते हैं कि हजारों लोगों की इस भीड़ को संभालने के लिए पंडाल की बनावट, आने-जाने के रास्तों और आपात स्थिति में निकासी की व्यवस्था कितनी अहम होती है।


निष्कर्ष,
इस दर्दनाक हादसे ने त्योहारों के दौरान भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के नतीजों से ही साफ होगा कि चूक कहां हुई और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।