बुलंदशहर को मिलेंगी 17 नई अदालतें, लंबित मुकदमों के निपटारे में आएगी तेजी
बुलंदशहर में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश की जिला न्यायपालिका में सालों से लंबित पड़े मुकदमों को जल्द निपटाने के मकसद से सरकार ने पहले चरण में 900 नए कोर्ट बनाने को मंजूरी दे दी है, जिसमें से 17 नए कोर्ट सीधे बुलंदशहर जिले के हिस्से आए हैं। इससे तारीख-दर-तारीख अटके पड़े मुकदमों के निपटारे में अब रफ्तार आने की उम्मीद है।
प्रदेशभर में बनेंगे कुल 9149 कोर्ट
दरअसल सरकार ने पूरे उत्तर प्रदेश में कुल 9149 नए कोर्ट स्थापित करने की योजना बनाई है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। प्रमुख सचिव न्याय उदय प्रताप सिंह के आदेश के मुताबिक, पहले चरण में अलग-अलग जिलों के लिए 900 नए कोर्ट और उनसे जुड़े पदों को मंजूरी दी गई है। इसी कड़ी में बुलंदशहर को 17 कोर्ट का तोहफा मिला है।
इन 17 नई अदालतों में 6 हायर ज्यूडिशियल सर्विस (HJS) की अदालतें, 9 सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालतें और 2 सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालतें शामिल हैं। हालांकि यह पूरी व्यवस्था एक साथ नहीं, बल्कि मौजूदा और नए पदों के हिसाब से सुविधाओं की उपलब्धता को देखते हुए धीरे-धीरे लागू की जाएगी।
2.65 लाख मुकदमे अभी भी लंबित, 45 साल तक पुराने केस भी शामिल
बुलंदशहर कोर्ट में इस वक्त करीब 2.65 लाख मुकदमे लंबित हैं, जिनमें कुछ केस तो 45 साल तक पुराने बताए जा रहे हैं। नई अदालतों के गठन के बाद इन मुकदमों के निपटारे में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। बुलंदशहर की न्यायपालिका जिले के घनी आबादी वाले क्षेत्रों की कानूनी जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है।
अभी 50-53 अदालतें, जल्द बढ़कर होंगी करीब 70
फिलहाल जिले में जिला न्यायाधीश न्यायालय, परिवार न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), पॉक्सो विशेष अदालतें, एससी/एसटी विशेष न्यायालय के साथ-साथ स्याना और डिबाई जैसे तहसील स्तर के ग्राम न्यायालयों को मिलाकर करीब 50 से 53 नियमित और विशेष अदालतें काम कर रही हैं। अब 17 नई अदालतें जुड़ने के बाद जिले में कुल न्यायिक बेंचों की संख्या बढ़कर करीब 70 हो जाएगी, जिससे जिले का न्यायिक ढांचा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगा।

