नोएडा से गुरुग्राम सिर्फ 30 मिनट में! अब उड़ने वाली टैक्सी से मिलेगी जाम से निजात
दिल्ली-NCR में रोजाना घंटों ट्रैफिक जाम में फंसने वाले लोगों के लिए जल्द ही एक शानदार विकल्प सामने आ सकता है। इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज और अमेरिका की आर्चर एविएशन मिलकर भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी सेवा शुरू करने की तैयारी में जुटी हैं। इस योजना के तहत नोएडा से गुरुग्राम के बीच जो सफर सड़क मार्ग से डेढ़ से ढाई घंटे तक ले लेता है, वही दूरी हवाई मार्ग से महज 27 से 30 मिनट में तय हो सकेगी।
बिना रनवे के उड़ान भरेगा यह विमान
इस सेवा के लिए आर्चर एविएशन के खास डिज़ाइन किए गए ‘Midnight’ eVTOL विमान का इस्तेमाल किया जाएगा। eVTOL यानी इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग विमान को उड़ान भरने के लिए लंबे रनवे की जरूरत नहीं पड़ती। यह बिल्कुल हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उड़ सकता है और उसी तरह लैंड भी कर सकता है, जिससे शहरों के भीतर इसका इस्तेमाल काफी आसान हो जाता है।
एक पायलट, चार यात्री और पूरी तरह इलेक्ट्रिक सफर
Midnight में एक पायलट के साथ चार यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। यह खासतौर पर शहरी और कम दूरी की यात्राओं के लिए ही तैयार किया गया है। सबसे अहम बात यह है कि यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक पावर से चलेगा, जो पारंपरिक ईंधन से चलने वाले हेलीकॉप्टरों का एक बेहतर और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बन सकता है। कंपनी का दावा है कि इसकी प्रोपेलर तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सामान्य हेलीकॉप्टर के मुकाबले कम शोर करे, हालांकि असली परिचालन के दौरान ही इसका सही आकलन हो सकेगा।
200 विमानों का हुआ समझौता, साल के अंत तक शुरुआत का लक्ष्य
भारत में इस सेवा के बड़े स्तर पर विस्तार के लिए इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज और आर्चर एविएशन के बीच करीब 200 Midnight eVTOL विमानों को लेकर समझौता हो चुका है, जो अर्बन एयर मोबिलिटी को लेकर कंपनियों की गंभीरता को दिखाता है। योजना के मुताबिक 2026 के अंत तक भारत में यह सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में दिल्ली-NCR के अलावा मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों को भी इसमें शामिल किए जाने की योजना है।
DGCA की मंजूरी अभी बाकी
हालांकि इस सेवा को आम लोगों तक पहुंचाने से पहले कई अहम प्रक्रियाओं से गुजरना बाकी है। विमान की प्रमाणन प्रक्रिया, सुरक्षा मंजूरी और शहरों में वर्टीपोर्ट जैसे जरूरी ढांचे का निर्माण होना जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि भारत में इसका व्यावसायिक संचालन विमानन नियामक DGCA की मंजूरी और तय सुरक्षा मानकों के दायरे में ही शुरू हो सकेगा।

