यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: 19 चालान, 1.75 लाख का जुर्माना, फिर भी सड़क पर दौड़ती रही मौत बनी बस
यमुना एक्सप्रेसवे पर आग लगने से 9 लोगों की जान लेने वाली बस दरअसल काफी समय से यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए सड़कों पर दौड़ रही थी। यह हादसा जेवर थाना क्षेत्र में दयानतपुर गांव के पास हुआ, जब दिल्ली से महोबा जा रही राज कल्पना ट्रैवल्स की स्लीपर बस में करीब 35 से 40 यात्री सवार थे। पुलिस के मुताबिक बस का रजिस्ट्रेशन नंबर BR 32 PA 8647 था और शुरुआती जांच में वायरिंग की खराबी से निकली चिंगारी को आग की वजह माना गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बस के इंजन से आवाज आने की शिकायत लगातार मिल रही थी, लेकिन कार्रवाई सिर्फ चालान काटने तक ही सीमित रही। बस को सड़क से हटाने या उसकी तकनीकी जांच कराने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
पहले भी सामने आ चुकी थीं गंभीर खामियां
रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी 2026 में भी चिल्ला में इसी बस का चालान हुआ था, जब पता चला कि इसे 20 साल से कम उम्र के ड्राइवर से चलवाया जा रहा था। इसके बाद भी बस का संचालन नहीं रुका। जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर भी चालान काटा गया था।
कुल मिलाकर बस के खिलाफ अलग-अलग नियमों के उल्लंघन के 19 चालान थे, जिनकी कुल रकम 1.75 लाख रुपये बताई जा रही है। इतने चालान होने के बावजूद बस बेरोकटोक सड़कों पर दौड़ती रही।
बस की बॉडी और दस्तावेजों में भी गड़बड़ी
बस की बॉडी को लेकर भी हैरान करने वाली बात सामने आई। RC में बस का रंग काला दर्ज था, जबकि हादसे के वक्त यह पीले-सफेद रंग की थी। परमिट और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन के भी अलग से चालान हो चुके थे।
हादसे के बाद FIR में यात्रियों द्वारा पहले जलने की बदबू की शिकायत करने और बस के समय पर न रुकने के आरोप भी दर्ज किए गए हैं, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अगर वक्त रहते बस रोक दी जाती, तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। हादसे में घायल हुए कई यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई।
हादसे के बाद जागी सरकारी मशीनरी
नौ मौतों के बाद पुलिस, प्रशासन, अग्निशमन विभाग और यातायात महकमा हरकत में आया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवारों के लिए दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। लेकिन सवाल यही उठ रहा है कि जब बस के खिलाफ लगातार चालान कटते रहे और शिकायतें आती रहीं, तो समय रहते इसे सड़क पर चलने से रोकने की ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
यह हादसा एक बार फिर यातायात नियमों के पालन और उनकी निगरानी व्यवस्था की पोल खोलता है, जहां जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ चालान काटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि असल खतरा सड़क पर बरकरार रहता है।
