UPITS में इस बार बिजनेस के साथ स्वाद का भी जलवा, हर जिले की थाली एक ही छत के नीचे
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआइटीएस) का चौथा संस्करण होने जा रहा है। हर बार की तरह इस बार भी मशीनरी, टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट के स्टॉल तो रहेंगे ही, लेकिन एक चीज़ पहली बार होगी जो शायद सबसे ज्यादा भीड़ खींचेगी — खाना।
पहली बार “एक जनपद-एक व्यंजन” योजना को ट्रेड शो में शामिल किया जा रहा है, और इसके लिए हाल नंबर 16 को पूरी तरह फूड हाल में बदल दिया गया है। सोचिए, प्रदेश के सभी 75 जिलों के मशहूर व्यंजन एक ही जगह — आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, लखनऊ के कबाब, वाराणसी की चाट। खरीदार और निर्यातक सिर्फ देखेंगे नहीं, चख भी सकेंगे। यानी बिजनेस डील टेबल पर होगी, लेकिन डील पक्की करने से पहले स्वाद की गारंटी भी मिल जाएगी।
दिलचस्प बात: यह सिर्फ मेले की रौनक बढ़ाने के लिए नहीं है। उपायुक्त उद्योग पंकज निर्वाण के मुताबिक, मकसद है हर जिले के यूनीक फूड प्रोडक्ट को एक ब्रांड के तौर पर स्थापित करना, ताकि छोटे शहरों के पारंपरिक स्वाद सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकें।
गौतमबुद्ध नगर के लिए भी यह मौका खास है। यहां की चार बेकरी इकाइयां — हीरा स्वीट्स, बेकर्स वे, के-ओ क्लाक और रोटीवा फिट प्राइवेट लिमिटेड — अपने उत्पाद इस फूड हाल में प्रदर्शित करेंगी।
कन्नौज की कलावती गट्टे: सौ साल से भी पुरानी मिठास की कहानी
फूड हाल में एक और नाम खास चर्चा में रहेगा — कन्नौज की मशहूर कलावती गट्टे की मिठाई।
सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि यह कोई नई मिठाई नहीं, बल्कि एक सदी पुरानी विरासत है। कलावती गट्टा भंडार की स्थापना 1923 में हुई थी — यानी आज से करीब सौ साल पहले। तब से लेकर अब तक, चार पीढ़ियां इस मिठाई की परंपरा को उसी आत्मीयता और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ा रही हैं। दुकान के मौजूदा संचालक सक्षम गुप्ता खुद इस व्यवसाय की चौथी पीढ़ी हैं।
बदलते दौर में जहां कई पारंपरिक मिठाइयां और व्यंजन धीरे-धीरे बाजार से गायब होते गए, वहीं कलावती गट्टे ने अपनी मौलिक पहचान और पुरानी बनाने की विधि को जस का तस बचाए रखा — और यही वजह है कि आज भी यह अपनी शुद्धता और खास मिठास के लिए पहचानी जाती है।
यूपीआइटीएस के फूड हाल में जब यह मिठाई स्टॉल पर सजेगी, तो यह सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि सौ साल की एक कहानी होगी — जो नई पीढ़ी के खरीदारों और निर्यातकों तक पहुंचने का इंतजार कर रही है।
