Latest newsTrendingनोएडा - ग्रेटर नोएडा

2027 से पहले गौतमबुद्धनगर बीजेपी में अंदरखाने घमासान, सोशल मीडिया पर फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा

ग्रेटर नोएडा।

विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अभी शुरू ही हुई हैं कि गौतमबुद्धनगर बीजेपी के भीतर नाराजगी के सुर सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आने लगे हैं। एक तरफ दादरी नगरपालिका चेयरमैन के देवर और बीजेपी नेता दिनेश शर्मा ने जिला संगठन पर पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का सीधा आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल एक पुराने नेता ने भी अपना दर्द पोस्ट के जरिए जाहिर कर दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों मामले बिल्कुल अलग-अलग वजहों से शुरू हुए, लेकिन दोनों ने ही संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका और तवज्जो को लेकर चल रही अंदरूनी बेचैनी को एक साथ सतह पर ला दिया है।

“सिर्फ चापलूसों को मिलती है सूचना”

दिनेश शर्मा ने अपनी पोस्ट में सीधे जिलाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए लिखा कि इस बार संगठन की जिम्मेदारी ऐसे शख्स को सौंपी गई है, जो किसी भी कार्यक्रम की जानकारी सिर्फ अपने चापलूसों या हां में हां मिलाने वालों तक ही पहुंचाता है। उनका आरोप है कि पार्टी की गतिविधियों और कार्यक्रमों से जुड़ी बुनियादी सूचनाएं तक बाकी कार्यकर्ताओं को नहीं दी जातीं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनकी इस पोस्ट पर 10 से ज्यादा पुराने बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तुरंत कमेंट कर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। कई ने तो यहां तक लिख दिया कि “अब पुरानी बीजेपी नहीं रही” — यानी यह सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि कई पुराने कार्यकर्ताओं की साझा नाराजगी का इजहार बनकर सामने आई। हालांकि इन आरोपों पर जिला संगठन की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

जेवर विधायक से मुलाकात, फिर बढ़ी दूरी

इसी बीच युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पद को लेकर भी अंदरखाने हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि संगठन में लंबे समय से सक्रिय एक पुराने नेता की जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी।

खुद को इस पद की दौड़ में सबसे आगे मानने वाले इस नेता ने सोशल मीडिया पर एक सीधा और तीखा सवाल उठाया — क्या जेवर विधायक बीजेपी नेता नहीं हैं? इस पोस्ट को सिर्फ पद की दावेदारी से जोड़कर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे संगठन के भीतर बढ़ती आंतरिक दूरी के एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।


कुल मिलाकर, 2027 के चुनावी समर से पहले ही गौतमबुद्धनगर बीजेपी में संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच जो खाई दिख रही है, वह आने वाले दिनों में पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकती है — खासकर तब, जब यह नाराजगी निजी बातचीत तक सीमित न रहकर खुलेआम सोशल मीडिया पर आ रही हो।