काले कपड़े पहनकर सड़क पर उतरी गौतमबुद्ध नगर कांग्रेस, सूरजपुर में मनाया ‘काला दिवस’, निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
ग्रेटर नोएडा।
गौतमबुद्ध नगर में जिला कांग्रेस कमेटी ने भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘काला दिवस’ मनाते हुए सूरजपुर स्थित जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पर विरोध प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला के नेतृत्व में पदाधिकारी और कार्यकर्ता काले कपड़े पहनकर पहुंचे और निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
किस बात का विरोध?
कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर बढ़ने के दौरान रोके जाने और हिरासत में लिए जाने का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों का जवाब दिया जाए।
प्रदर्शन के दौरान गूंजे नारे — ‘वोट चोरी बंद करो’, ‘वोट बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’, ‘लोकतंत्र पर हमला बंद करो’ और ‘निर्वाचन आयोग जवाब दो’। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि उनका विरोध सिर्फ अपने नेताओं के साथ हुए व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और जवाबदेही से भी जुड़ा है।
“असहमति का सम्मान ही लोकतंत्र की ताकत”
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करने का मकसद लोकतंत्र के प्रति अपनी चिंता जाहिर करना है। उनके मुताबिक, जब जनप्रतिनिधियों को निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने से रोका जाता है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं।
उन्होंने एक बड़ी बात कही कि लोकतंत्र की मजबूती सत्ता की ताकत से नहीं, बल्कि असहमति के सम्मान और जनता के अधिकारों की रक्षा से तय होती है। भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जवाब मांगने का अधिकार देता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
चोटीवाला ने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपील की कि गंभीर शिकायतों का तथ्यात्मक और प्रमाणिक जवाब दिया जाए, क्योंकि आयोग की प्रतिष्ठा उसकी निष्पक्षता, स्वतंत्रता और जवाबदेही से जुड़ी है।
संगठन प्रभारी मुकेश शर्मा ने भी इसी मांग को दोहराते हुए कहा कि आयोग को राजनीतिक दलों और जनता की ओर से उठाए गए सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, लोकतंत्र सिर्फ चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मताधिकार की सुरक्षा, संस्थाओं की निष्पक्षता और असहमति का सम्मान भी इसकी बुनियादी शर्तें हैं। जिला कांग्रेस कमेटी ने संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की बात कही।
कौन-कौन रहा मौजूद?
प्रदर्शन में अजय चौधरी, दुष्यंत नागर, मुकेश शर्मा, गौतम अवाना, विनोद पांडेय, निशा शर्मा, नीरज लोहिया, अशोक पंडित, शीबा राय, बिन्नू भाटी, सुरेंद्र प्रताप, कल्पना सिंह, मोहम्मद तकी, महाराज सिंह, धर्म सिंह, रमेश जीनवाल, अरुण गुर्जर, विजय नागर, कपिल भाटी, मोहित भाटी एडवोकेट, पुनीत मावी, नितीश चौधरी, सुबोध भट्ट, नीरज शर्मा, विपिन त्यागी, अरविंद रेक्सवाल, प्रिंस भाटी, प्रवीण रावल, अजब सिंह, धीरा सिंह, जतन सिन्हा, अब्दुल वाहिद, अनुराग भाटी एडवोकेट, गोल्डी, मोहम्मद इदरीशी, राहुल कश्यप, अनुज तिवारी, हेमंत भाटी, गिरीश शर्मा, अनुज भाटी, सुशील मावी, प्रवीण बैंसला, जितेंद्र नागर, निशांत भाटी, अंकित यादव, निशांत तंवर, सीपू कुमार, प्रदीप नागर, भूरा, कपिल नागर, सुनील भाटी, संजय फौजी, राजकुमार, नरेश मुखिया, अनित नागर, दिनेश शर्मा, संजय भाटी, आसिफ, शाहरुख, वेदप्रकाश, आजाद और पप्पू सिंह समेत अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
निष्कर्ष
कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए अपने नेताओं को रोके जाने का विरोध दर्ज कराया और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। ये सभी आरोप और मांगें कांग्रेस नेताओं की ओर से रखी गई हैं।
