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यमुना एक्शन प्लान पर सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल, 7 अक्टूबर को केंद्र के सामने देनी होगी पीपीटी

नोएडा।

यमुना की सफाई को लेकर चल रहे यमुना एक्शन प्लान पर सुप्रीम कोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट ने सीधे नोएडा अथॉरिटी से पूछा है कि बाढ़ क्षेत्र को ‘एक्टिव फ्लड प्लेन’ के आधार पर अलग क्यों किया गया।

दिलचस्प और अहम सवाल यह भी है कि कोर्ट ने एक्शन प्लान में बताई गई यूपी और दिल्ली की कुल 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में से कितनी बाढ़ क्षेत्र में स्थित हैं, इसका जवाब मांगा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि दिल्ली-2047 मास्टरप्लान, यमुना एक्शन प्लान के साथ तालमेल में है या नहीं। अब इन सवालों के जवाब के लिए यूपी और दिल्ली सरकार मिलकर 7 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) पेश करेंगी, जिसके बाद 4 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।

मामले की शुरुआत कहां से हुई?

इस पूरे विवाद की जड़ कोंडली ड्रेन (नाला) है। बिना साफ किए इसका पानी सीधे यमुना नदी में गिराया जा रहा था, जिससे भारी प्रदूषण फैल रहा था। पर्यावरणविद अभीष्ट कुसुम गुप्ता ने इसी मुद्दे को लेकर 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दायर की थी। एनजीटी ने इसे पर्यावरण नियमों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए अगस्त 2022 में नोएडा अथॉरिटी पर 100 करोड़ रुपये और दिल्ली जल बोर्ड पर 50 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया था।

यहीं से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा — नोएडा अथॉरिटी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई, और तभी से यह केस चल रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह सिर्फ इस एक नाले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी यमुना की बात करेगा। इसके लिए केंद्रीय गृह सचिव की अगुवाई में एक हाई पावर्ड कमिटी बनाई गई, जिसने अपनी यमुना एक्शन प्लान रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है।

एक्शन प्लान में क्या बड़ी कमी सामने आई?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यमुना एक्शन प्लान में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तहत आने वाले नदी तल, बाढ़ क्षेत्र या नालों पर हुए अतिक्रमण और अनधिकृत संरचनाओं को हटाने या स्थानांतरित करने का कोई प्रस्ताव ही नहीं है। प्लान में सिर्फ इतना बताया गया है कि 1799 अनधिकृत कॉलोनियों की पहचान की जा चुकी है, और इनके लिए एकीकृत सीवरेज प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसका 73 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

कोर्ट ने इसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह भी बताया जाए कि इन 1799 चिह्नित अनधिकृत कॉलोनियों में से कितनी बाढ़ क्षेत्रों में हैं — क्योंकि बाढ़ क्षेत्र में बसी कॉलोनियों के लिए सिर्फ सीवरेज सुधारना काफी नहीं, उनका समाधान अलग तरह का होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एक्शन प्लान को स्पष्ट रूप से समझने और इसके जरूरी कदमों की जानकारी के लिए एक विस्तृत पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दी जाए।

प्रशासनिक स्तर पर भी शुरू हुई हलचल

नोएडा अथॉरिटी की एसीईओ वंदना त्रिपाठी के मुताबिक, पिछले सप्ताह ही शासन स्तर पर यमुना की सफाई के प्लान को लेकर एक ऑनलाइन मीटिंग हो चुकी है, जिसमें पूरी योजना पर चर्चा की गई। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर अथॉरिटी स्तर से जो भी काम किए जाने हैं, वे कराए जाएंगे।