राजा भैया का शस्त्र पूजन: 500 से ज्यादा हथियारों की पूजा के बाद “दिखाने और खाने वाले दांत” वाले बयान से मचा सियासी शोर
प्रतापगढ़।
प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह है विजयादशमी पर उनका शस्त्र पूजन, जिसमें 500 से ज्यादा देशी-विदेशी हथियार नजर आए। लेकिन हथियारों की संख्या से ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है, जो पूजन के बाद सामने आया।
बेंती कोठी में क्या हुआ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजा भैया ने मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे अपने पैतृक आवास बेंती कोठी (बेंती राजभवन) में शस्त्र पूजन किया। धोती-कुर्ता और केसरिया साफा पहने राजा भैया ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हथियारों पर तिलक लगाया, पुष्प अर्पित किए और आरती की। पुरोहितों और वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार किया, और पूजन हनुमान जी की प्रतिमा के सामने हुआ।
दिलचस्प बात यह रही कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूजा में उनके जुड़वां बेटे शिवराज और बृजराज सिंह भी शामिल हुए। इसके अलावा ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि समेत सैकड़ों समर्थक अपने लाइसेंसी हथियारों के साथ पहुंचे। बताया गया कि सभी शस्त्रों के साथ लाइसेंस और नाम की पर्ची भी रखी गई थी, ताकि साफ रहे कि कौन सा हथियार किसका है।
राजा भैया ने क्या कहा?
पूजन के बाद राजा भैया ने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन अनादि काल से होता आया है, और यहां मौजूद सभी लोग उनका परिवार हैं। उन्होंने कहा कि सभी धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए संकल्पित हैं।
असली चर्चा इसी बयान के अगले हिस्से की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि यह नहीं सोचना चाहिए कि इतने ही हथियार हैं, क्योंकि हाथी के दांत दिखाने के और होते हैं और खाने के और। इस बयान पर समर्थकों की तालियां गूंजीं, जबकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर हथियारों और लाइसेंस पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि: पत्नी के आरोप और दूसरा साल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लगातार दूसरा साल है जब राजा भैया ने दशहरे पर समर्थकों के साथ इस तरह हथियारों का पूजन किया। इससे पहले उनकी पत्नी भानवी सिंह ने 18 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि राजा भैया के पास अवैध हथियारों का जखीरा है। रिपोर्ट्स में यह भी जिक्र है कि भानवी सिंह ने जून 2025 में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था। ये आरोप भानवी सिंह के हैं, और इस मामले में राजा भैया की ओर से इन आरोपों पर क्या स्थिति रही, यह उपलब्ध रिपोर्ट्स में स्पष्ट नहीं है।
क्षत्रिय परंपरा या विवाद?
विजयादशमी पर शस्त्र पूजन भारतीय परंपरा, खासकर क्षत्रिय परंपरा का हिस्सा माना जाता है। राजा भैया ने भी इसे अपने परिवार की पुरानी परंपरा बताया है। लेकिन जब यह परंपरा किसी चर्चित राजनेता के नाम और सैकड़ों हथियारों के साथ जुड़ती है, तो यह धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर सार्वजनिक बहस का विषय बन जाती है।
निष्कर्ष
शस्त्र पूजन परंपरा के नाम पर हुआ यह आयोजन एक बार फिर राजा भैया को चर्चा के केंद्र में ले आया है। हथियारों की वैधता और बयान के मतलब पर सवाल अपनी जगह हैं, लेकिन इस बारे में किसी आधिकारिक कार्रवाई या स्पष्टीकरण की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

