मथुरा की हेरिटेज सिटी पर सचिव समिति ने मांगा जवाब, बाढ़ का खतरा और लाइसेंस फीस पर फंसा पेंच
ग्रेटर नोएडा।
मथुरा जिले में यीडा (यमुना प्राधिकरण) की महत्वाकांक्षी हेरिटेज सिटी परियोजना को हरी झंडी मिलने से पहले एक और इम्तिहान से गुजरना होगा। बुधवार को लखनऊ में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में दो अहम बिंदुओं पर स्थिति साफ करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहला सवाल सीधे प्रकृति से जुड़ा है — क्या प्रस्तावित हेरिटेज सिटी यमुना नदी की बाढ़ से प्रभावित हो सकती है? दूसरा सवाल पैसों से जुड़ा है — इस परियोजना के लिए लाइसेंस फीस तय की जाए या नहीं? इन्हीं दोनों मुद्दों पर सुझाव लेकर प्रस्ताव को दोबारा सचिव समिति के सामने रखने को कहा गया है।
750 एकड़, 6,210 करोड़ रुपये की परियोजना
यह परियोजना यमुना प्राधिकरण के फेज दो में शामिल राया अर्बन सेंटर के तहत प्रस्तावित है। 750 एकड़ में फैली इस हेरिटेज सिटी की अनुमानित लागत 6,210 करोड़ रुपये है। इसे एनएच-44 से यमुना एक्सप्रेसवे के बीच प्रस्तावित 15.3 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर विकसित किया जाएगा, और इस सड़क का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कर रहा है।
बाढ़ ने बढ़ाई चिंता
दिलचस्प और अहम बात यह है कि हेरिटेज सिटी की प्रस्तावित साइट पहले यमुना नदी की बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है। यही वजह है कि समिति ने साफ निर्देश दिया है कि सिंचाई विभाग से मूल्यांकन कराया जाए कि भविष्य में यमुना की बाढ़ से हेरिटेज सिटी को किसी तरह का नुकसान न हो।
इसके अलावा लाइसेंस फीस तय करने के सवाल पर भी राय ली जाएगी। फिर यीडा को पहले अपने बोर्ड और उसके बाद सचिव समिति के सामने नया प्रस्ताव रखना होगा।
अब तक कहां पहुंचा था मामला?
हेरिटेज सिटी परियोजना की निविदा प्रदेश सरकार की निविदा मूल्यांकन समिति से पहले ही मंजूर हो चुकी थी। उसके बाद बुधवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में गठित सचिव समिति की स्वीकृति के लिए इसे रखा गया, लेकिन समिति ने ऊपर बताए दोनों बिंदुओं पर स्पष्टता मांगते हुए इसे लौटा दिया। बैठक में यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह के साथ शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
आगे का रास्ता
सचिव समिति की स्वीकृति मिलने के बाद ही निविदा को प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उसके बाद पीपीपी मॉडल पर हेरिटेज सिटी परियोजना के डेवलपर के चयन के लिए निविदा जारी की जाएगी।
6,210 करोड़ रुपये की इस बड़ी परियोजना में अभी कई पड़ाव बाकी हैं। बाढ़ से सुरक्षा और लाइसेंस फीस जैसे सवालों पर साफ जवाब मिलने के बाद ही मथुरा की यह हेरिटेज सिटी जमीन पर उतरने की ओर आगे बढ़ पाएगी।

