18 चालान, फिर भी सड़कों पर दौड़ती रही बस, मंगलवार को एक्सप्रेसवे पर लगी आग
ग्रेटर नोएडा।
माल लादकर नियम-कायदों को ताख पर रखकर सड़कों पर दौड़ रही बसों पर कार्रवाई के नाम पर जो हो रहा है, वह सिर्फ खानापूर्ति भर है — और इसका ताजा उदाहरण मंगलवार को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर आग लगी बस के रूप में सामने आ गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह बस दिल्ली से बिहार के बीच लगातार यातायात नियमों की अनदेखी करते हुए चलाई जा रही थी, लेकिन इस पूरे समय में कार्रवाई सिर्फ चालान काटने तक ही सीमित रही।
18 चालान, फिर भी सड़क पर फर्राटा
ऑनलाइन परिवहन एप पर इस बस के खिलाफ कुल 18 चालान दर्ज मिले, जिनकी कुल रकम करीब 1,71,500 रुपये बताई जा रही है। हालांकि परिवहन विभाग के मुताबिक बस में असल में 36 चालान कटे हुए हैं — यानी आंकड़ों में भी अंतर है, जो खुद निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर चालान परमिट उल्लंघन को लेकर ही काटे गए थे। फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो बस का परमिट रद्द किया, न उसे सीज किया — बस चालान काटकर मामला खत्म मान लिया गया, और संचालक दिल्ली-बिहार रूट पर नियमों को धत्ता बताकर गाड़ी दौड़ाता रहा।
नियम क्या कहते हैं?
इस बस के 2026 में ही परमिट उल्लंघन के तीन चालान कट चुके थे, और ओवरलोडिंग के भी कई मामले दर्ज थे। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 86 के तहत साफ प्रावधान है कि बार-बार लापरवाही बरतने पर वाहन का परमिट निरस्त किया जाना चाहिए, और नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर वाहन को सीज करने तक का नियम है।
टूरिस्ट परमिट पर माल ढुलाई — सीधा उल्लंघन
दिलचस्प और गंभीर बात यह है कि इस बस के संचालक ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट ले रखी थी, जिसके तहत पर्यटक वाहन पूरे देश में संचालित किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार के 2023 के ऑल इंडिया टूरिस्ट व्हीकल्स परमिट नियमों का मकसद ही वैध परमिट के आधार पर पर्यटक वाहनों के निर्बाध संचालन को सुगम बनाना था — लेकिन इस परमिट के तहत माल ढुलाई की इजाजत बिल्कुल नहीं है। इसके बावजूद यह बस लगातार इस नियम का उल्लंघन करती रही।
कब-कब कटा चालान?
- 7 सितंबर: ओवरलोडिंग के मामले में 31,000 रुपये का चालान
- 22 जुलाई: 17,500 रुपये का चालान
- जून: दो बार परमिट उल्लंघन के आरोप में चालान
- मार्च: 12,500 रुपये का परमिट उल्लंघन का चालान
- 15 मई 2025: ओवरलोडिंग के आरोप में 35,000 रुपये का चालान
इतने सारे चालान और बार-बार नियम तोड़ने के बावजूद इस बस के खिलाफ कभी भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई — और नतीजा मंगलवार को एक्सप्रेसवे पर आग के रूप में सामने आया। यह मामला साफ दिखाता है कि जब तक सिर्फ चालान काटने तक कार्रवाई सीमित रहेगी, तब तक सड़कों पर ऐसे खतरे बने रहेंगे।

