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टिकट कटा तो रो पड़े संजयन त्रिपाठी, गाड़ी से उतारा बीजेपी का झंडा, अब लड़ेंगे निर्दलीय?

आगामी एमएलसी (विधान परिषद) चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है, और इस बार विवाद का केंद्र बना है गोरखपुर। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पिछले 6 साल से दावेदारी कर रहे संजयन त्रिपाठी का टिकट कटते ही उनका दर्द कैमरे के सामने छलक पड़ा।

दिलचस्प और भावुक करने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में संजयन त्रिपाठी रोते हुए नजर आ रहे हैं — और वो भी अपनी गाड़ी से बीजेपी का झंडा खुद उतारते हुए। उन्होंने साफ कह दिया है कि अब वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।

“6 साल निष्ठा निभाई, फिर भी नजरअंदाज हुआ”

देवरिया जिले के मटलार डिग्री कॉलेज में हिंदी विभाग के पूर्व एचओडी रहे संजयन त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने 6 वर्षों तक पार्टी के हर निर्देश का पालन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया। इसके बावजूद पार्टी ने उनकी जगह ध्रुव त्रिपाठी को टिकट थमा दिया — एक ऐसे शख्स को, जो पार्टी के प्राथमिक सदस्य तक नहीं थे।

इस फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए संजयन त्रिपाठी ने एक दिलचस्प उपमा भी दी: “यह बगावत नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ने का अधिकार है। जब नदी की अविरल धारा को रोकने की कोशिश की जाती है, तो वह अपना रास्ता खुद बनाती है। मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरे साथ जुड़े लोग हैं।”

सियासी सफर जो नया नहीं है

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि संजयन त्रिपाठी के लिए चुनावी मैदान कोई नई जगह नहीं है। वे 2022 में बीजेपी में शामिल हुए थे, लेकिन इससे पहले 2006, 2007, 2010 और 2016 में निर्दलीय और कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा व विधान परिषद चुनाव लड़ चुके हैं — यानी उनका राजनीतिक अनुभव किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा।

क्या सपा देगी साथ?

टिकट कटने और बागी रुख अपनाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि समाजवादी पार्टी उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि सपा पहले ही इस सीट से कमलेश यादव को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, जिससे संजयन त्रिपाठी को सपा का समर्थन मिलने के समीकरण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दूसरी ओर, बीजेपी के नए प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी भी कोई नया चेहरा नहीं हैं — वे तीन बार माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) से एमएलसी रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।


फिलहाल संजयन त्रिपाठी के निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले और बीजेपी के प्रति खुली नाराजगी ने इस एमएलसी चुनाव को सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक बना दिया है — और आने वाले दिनों में यह लड़ाई और दिलचस्प होती जाएगी।