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भाजपा का अगला दांव: अब जिला और बूथ तक होगी ‘सर्जरी’, 17 प्रकोष्ठों पर टिकी 2027 की नींव

नोएडा। प्रदेश कार्यकारिणी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय टीम की घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपना पूरा फोकस अब सीधे जिला और बूथ स्तर पर शिफ्ट कर दिया है। पार्टी की अगली रणनीति जिला स्तर पर गठित होने वाले विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों के चयन पर केंद्रित है — और यहीं से 2027 के विधानसभा चुनाव की असली पटकथा लिखी जानी है।

सूत्रों के मुताबिक अगले सप्ताह हर जिले में युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, महिला मोर्चा समेत 17 प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्षों की सूची जारी हो जाएगी। संगठन के भीतर इस पर लगातार मंथन चल रहा है, और हर नाम को बारीकी से परखा जा रहा है।

वफादारी नहीं, अब समीकरण चलेगा

पार्टी आलाकमान ने इस बार साफ संदेश दे दिया है — नियुक्तियां केवल वफादारी के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधते हुए की जाएंगी। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की नाराजगी को संभालने के लिए संगठन में उनका सोच-समझकर समायोजन किया जा सकता है। पार्टी युवा मोर्चा को फ्रंट पर लाने की तैयारी में जुटी है।

महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी पार्टी गंभीर नजर आ रही है। हर जिले में कम से कम 2-3 अहम प्रकोष्ठ — जैसे महिला मोर्चा, महिला उद्यमी प्रकोष्ठ, आईटी प्रकोष्ठ और बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ — की कमान ऐसी महिलाओं को सौंपने की तैयारी है, जो आगे बढ़कर सक्रिय रूप से काम कर सकें। इसी तरह पिछड़ा मोर्चा में भी युवा चेहरों को जगह देने की योजना है। भाजपा नेताओं का कहना है कि ये नियुक्तियां सिर्फ “पोस्टर” नहीं होंगी, बल्कि 2027 के असली बूथ मैनेजर साबित होंगी।

अंदरखाने खींचतान भी चरम पर

जैसे-जैसे प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों की नियुक्ति की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पार्टी के भीतर का सियासी तापमान भी बढ़ता जा रहा है। गौतमबुद्ध नगर भाजपा में इस वक्त तीन गुट सक्रिय हैं, और तीनों ही अपने-अपने करीबियों को प्रकोष्ठों में पदाधिकारी बनवाने की कोशिश में जुटे हैं।

जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा और महानगर अध्यक्ष महेश चौहान तीनों गुटों के बीच संतुलन बनाने और समायोजन की बात कह रहे हैं। लेकिन असल में बाजी किसके हाथ लगेगी, कौन सा गुट ज्यादा प्रभावी साबित होगा और किसके ज्यादा पदाधिकारी बनेंगे — इसका पर्दा तो आधिकारिक घोषणा के बाद ही उठेगा।

किसान मोर्चा और युवा मोर्चा रहेंगे सबसे अहम

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को गन्ना बेल्ट कहा जाता है, इसलिए आगामी चुनाव में किसान मोर्चा की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। यही वजह है कि किसान मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए भी जबरदस्त रस्साकसी चल रही है।

लेकिन इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा “हॉट सीट” युवा मोर्चा अध्यक्ष पद है। इस पद के लिए दावेदार युवाओं की लंबी कतार लगी हुई है, और सभी को संतुष्ट करना भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा — क्योंकि पार्टी बखूबी जानती है कि 2027 के लिए अभी से कड़ी मेहनत करनी होगी। बूथ समिति से लेकर सोशल मीडिया तक, युवाओं की भूमिका निर्णायक रहने वाली है। सड़क पर ताकत दिखाना, विरोध का तुरंत जवाब देने के लिए भीड़ जुटाना, और सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाना — यह सारा जिम्मा इन्हीं युवा कंधों पर होगा।

दौड़ में शामिल प्रमुख युवा चेहरे

युवा मोर्चा और किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष व महानगर अध्यक्ष पद की दौड़ में जो नाम सबसे आगे चल रहे हैं, उनमें शामिल हैं — उमेश भाटी, ओमकार भाटी, अखिलेश नागर, चेतन वशिष्ठ, योगराज रावल, अमित भाटी, रिंकू भाटी, विपुल शर्मा, अनुज शर्मा, अर्पित गोयल, रिंकू तंवर, इंदराज खटाना और मुख्तानंद प्रधान।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन नामों में से कौन बाजी मारेगा, यह सिर्फ योग्यता ही नहीं बल्कि जातीय संतुलन और गुटीय समीकरणों पर भी निर्भर करेगा। संगठन के भीतर सूत्रों का मानना है कि अगले कुछ दिन गौतमबुद्ध नगर भाजपा के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं, जब यह तय होगा कि जमीनी स्तर पर पार्टी की असली ताकत किसके हाथों में सौंपी जाती है।