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यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के किसानों को मिलेगी टोल से छूट, 17 सितंबर तक जमा करने होंगे दस्तावेज

ग्रेटरग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे के निर्माण और संचालन के बाद से टोल में छूट की मांग कर रहे जेवर क्षेत्र के किसानों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर आखिरकार सहमति बन गई है और अब एक्सप्रेसवे पर उनके वाहन बिना टोल चुकाए गुजर सकेंगे। हालांकि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए स्थानीय निवासियों को 17 सितंबर तक जरूरी दस्तावेज एक्सप्रेसवे का संचालन करने वाली कंपनी को जमा कराने होंगे। तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा न कराने वाले वाहन स्वामियों को यह सुविधा फिलहाल नहीं मिल पाएगी, इसलिए प्रशासन ने सभी पात्र किसानों और ग्रामीणों से जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।

जेवर विधायक के अनुसार, यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चली आ रही बातचीत और प्रयासों की कहानी है। यमुना प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे का संचालन करने वाली सुरक्षा समूह कंपनी के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की वार्ता हुई, जिसमें क्षेत्र के प्रभावित गांवों की स्थिति, किसानों की मांगों और एक्सप्रेसवे के निर्माण से हुए असर पर विस्तार से चर्चा की गई। इन बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया कि जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे से प्रभावित आसपास के ग्रामीणों को जेवर टोल प्लाजा पर टोल शुल्क से छूट दी जाएगी। यह फैसला उन परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनकी जमीन एक्सप्रेसवे के निर्माण में सीधे तौर पर इस्तेमाल हुई थी या जो इसके आसपास बसे गांवों में रहते हैं और रोजमर्रा के कामकाज के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।

छूट पाने के लिए क्या करना होगा

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए निवासियों को अपनी पात्रता साबित करने के वास्ते कुछ जरूरी दस्तावेज जमा कराने होंगे। प्रशासन ने इसके लिए स्पष्ट सूची जारी की है, जिसमें निम्नलिखित कागजात शामिल हैं:

  • स्थानीय निवासी होने का प्रमाण (निवास प्रमाण पत्र या अन्य मान्य दस्तावेज)
  • आधार कार्ड
  • वाहन की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) की प्रति

इच्छुक निवासियों को ये सभी दस्तावेज लेकर 17 सितंबर तक जेवर टोल प्लाजा कार्यालय में जमा कराने होंगे और वहीं अपने वाहन का पंजीकरण भी कराना होगा। दस्तावेज जमा कराने के बाद संबंधित कंपनी द्वारा इनका सत्यापन किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवेदन करने वाला व्यक्ति वास्तव में प्रभावित क्षेत्र का ही निवासी है। सत्यापन और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित वाहन स्वामी को टोल शुल्क से छूट की सुविधा मिलनी शुरू होगी। यानी सिर्फ दस्तावेज जमा करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि प्रक्रिया के पूरी तरह पूर्ण होने के बाद ही यह लाभ प्रभावी रूप से मिलेगा।

14 साल पुरानी मांग हुई पूरी

क्षेत्रवासी बीते 14 वर्षों से इस सुविधा की मांग कर रहे थे। यमुना एक्सप्रेसवे के निर्माण के समय से ही आसपास के गांवों के लोग यह कहते आए हैं कि जिस जमीन और क्षेत्र से होकर यह एक्सप्रेसवे गुजरता है, वहां के मूल निवासियों को टोल शुल्क में छूट दी जानी चाहिए। इतने लंबे समय तक यह मांग अलग-अलग मंचों पर उठाई जाती रही, लेकिन अब जाकर प्रशासनिक स्तर पर इस पर सहमति बनी है। स्थानीय लोगों के लिए यह न सिर्फ आर्थिक राहत की बात है, बल्कि इसे उनके वर्षों के संघर्ष और मांग की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में पंजीकरण प्रक्रिया को और सुगम बनाया जाएगा, ताकि पात्र लोगों को दस्तावेज जमा कराने में किसी तरह की परेशानी न हो। फिलहाल सभी की निगाहें 17 सितंबर की समय सीमा पर टिकी हैं, जिसके भीतर अधिक से अधिक पात्र निवासियों को इस सुविधा से जोड़ने की कोशिश की जा रही